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  • कोरोनावायरस से ज्यादा खतरनाक है संप्रदायिकता


कोरोना वायरस से वैश्विक आपदा उत्पन्न हुई है इससे पूरी दुनिया जूझ रही है। हमारा मुल्क़ भी जूझ रहा है। हर एक नागरिक को एक होकर इस महामारी से लड़ने की जरूरत है। लेकिन हमारे मुल्क़ के दोनों प्रमुख संप्रदायों को मीडिया ने इस कदर बांट दिया है कि अब ये लड़ाई हिन्दू-मुस्लिम की हो गई है। ऐसा लग रहा है इंसानियत भी दो भागों में तकसीम हो गई है। एक संप्रदाय के लोग अज़ीम प्रेमजी, डाॅ युसूफ हामिद का उदाहरण देकर कह रही है कि इसने इतने दान दिए परंतु अडानी अंबानी ने नहीं दिया। तो दुसरी तरफ के लोग अक्षय कुमार, रत्न टाटा का उदाहरण देकर कह रहे हैं हमारे संप्रदाय के स्टार ने इतने दान दिए लेकिन तीनों खान ने नहीं दिया। यह बहुत ही भयावह है।  संप्रदायिक ताकत ने इस कदर पैर जमा लिए हैं इस खुबसूरत मुल्क़ में कि अब नफ़रत की ज्वालामुखी हर तरफ़ दिखाई दे रही है। इसी बीच कल एक बहुत ही डरावनी खबर आई कि दिल्ली के निज़ामुद्दीन दरगाह के मरकज में कुछ देशी और विदेशी लोग रूके हुए हैं उनमें से कुछ को कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। निजामुद्दीन मरकज में ही सुन्नी मुसलमानों की एक संस्था, तबलीग़ी जमात है। यहीं पर लगभग 4000 लोग दूर-दूर से आकर एक कार्यक्रम के लिए 11-12 मार्च से इकट्ठे हुए थे। वैसे तो  इन सभी को 24 मार्च के पुलिस नोटिस से पहले ही चले जाना चाहिए था। लगभग 1500 लोग चले भी गए। लेकिन जनता कर्फ्यू के दौरान और लॉकडाउन के बाद जितनी तत्परता और एहतियात की जरूरत थी, वो नहीं हुई। लापरवाही लोकल प्रशासन की भी रही है। लॉकडाउन के दौरान बाहर निकलने के लिए जो ऑफ़िसियल पास जारी होना था, उसके लिए जमात ने 24 मार्च को ही अर्ज़़ी दी मगर कार्यवाही नहीं की गई। ये सभी जानकारी आसानी से उपलब्ध है। लेकिन मीडिया ने इस घातक लापरवाही के लिए एक खास संप्रदाय को दोषी ठहराकर एक बार फिर से देश को बांटने की कोशिश की। देश और दुनिया भर के सारे मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, दरगाह आदि बंद हैं। ऐसे छिटपुट गैरजिम्मेदाराना काम कई जगहों पर हुई है। ऐसी मूर्खताएं देश और समाज पर भारी पड़ सकती है। गलती करने वाले व्यक्ति आम हो या खास, मजहबी हो या सरकारी,  हिन्दू हो या मुसलमान गलती की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लेकिन कुछ की गलती को पूरे संप्रदाय पर मढंना ग़लत है। यह अंदर से सड़ जाने की पराकाष्ठा है। संप्रदायिक होने की निकृष्ट उदाहरण है।

लेखक :-  रहमत

Comments

  1. Very nice keep it up best wishes

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  2. Bahut acha Rehmat Bhai
    Hn bhai Jo bhi tumne kaha voh cent percent true h.

    Itne gambhir samay mai sampradayikta ka card kehlna bahut galat h. Samjh corona se baad Mai ladega Mai samjhta hu usse pehle apne ander ki choti soch se ladna chahiye.

    Aaj samaj ko apni ganga jamuni tehzib ko yaad karne ki jarurat h.

    ReplyDelete
  3. Bahut ache Rehmat bhai.
    Aapne Jo bhi likha h cent percent true h.

    Samaj Corona se toh baad Mai ladega pehle usse apne ander ki choti soch se ladna ki jarurat h.

    Itni gambhir situation Mai sampradayikta ka card kehlna bahut galat h.
    Aaj samaj ko apni ganga jamuni tehzib ko yaad karne ki jarurat h

    ReplyDelete
  4. Bahut ache Rehmat bhai.
    Aapne Jo bhi likha h cent percent true h.

    Samaj Corona se toh baad Mai ladega pehle usse apne ander ki choti soch se ladna ki jarurat h.

    Itni gambhir situation Mai sampradayikta ka card kehlna bahut galat h.
    Aaj samaj ko apni ganga jamuni tehzib ko yaad karne ki jarurat h

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