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"जाति विहीन समाज से जाती विहीन भारत: अंबेडकर" विषय पर वेबिनार


आत्मा राम सनातन धर्म महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय), अंबेडकर स्टडी सर्कल
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कोरोना वायरस के कारण देशभर में लाॅकडाउन चल रहा है। सभी शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षिक गतिविधियों को भी रोक दिया गया है। किंतु विभिन्न काॅलेजों में आॅनलाइन प्लेटफार्म के जरिए कक्षाओं के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों को भी जारी रखा जा रहा है। इस संबंध में आज दिनांक 21 अप्रैल 2020 को आत्मा राम सनातन धर्म महाविद्यालय के अंबेडकर स्टडी सर्कल द्वारा "जाति विहीन समाज से जाति विहीन भारत" के विषय पर एक दिन का वेबिनार आयोजित किया गया। वर्धा विश्वविद्यालय से डाॅ सुनिल कुमार सुमन और मुंबई विश्वविद्यालय से डाॅ नारायण भोसले वक्ता थे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ ज्ञानतोष कुमार झा ने दोनों वक्ताओं का स्वागत करते हुए श्रोताओं को संबोधित किया और अंबेडकर स्टडी सर्कल के कार्यों, महाविद्यालय के शैक्षिक गतिविधियों से अवगत कराया।

व्याख्यान का शुरुआत करते हुए डॉ सुनील कुमार सुमन ने अपने वक्तव्य में डाॅ अंबेडकर जी के दृष्टि में भारत कैसा था इसका विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि "हजार साल पहले मनु के संविधान में महज कुछ ही लोगों को जगह दी गई थी लेकिन बाबा साहब अम्बेडकर जी ने जिस संविधान का निर्माण किया उसमें सभी लोगों को बराबर जगह मिली है।"   उन्होंने आगे कहा कि "आधुनिक भारत के निर्माण में जो अंबेडकर जी का योगदान है उसे समझने और जानने के लिए बाबा साहब को और अधिक पढ़ना होगा।" आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि "आरक्षण को लेकर बाबा साहब को कटघरे में रखा जाता है लेकिन आरक्षण बाबा साहब की नहीं बल्कि महात्मा गांधी जी की देन है। जो पुना पैक्ट का नतीजा है।"  डॉ सुनील कुमार ने अपने वक्तव्य में बाबा साहब अम्बेडकर जी द्वारा महिलाओं के लिए किए गए कामों पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि "  डॉ अंबेडकर ने महिलाओं के लिए समान काम समान वेतन, मेटरनिटी लीव, हिंदू कोड बिल को लेकर लड़ते रहे।"

अगले वक्तव्य में डॉ नारायण भोसले ने अपने व्याख्यान के केंद्र में आदिवासी और घूमंतू जनजाति को रखा। उन्होंने कहा कि "भारत में लगभग 15 करोड़ ऐसी जनजाति है जो रोज अपनी जीवन यापन के लिए संघर्षरत हैं। शिक्षा और जानकारी का अभाव है।"   डॉ नारायण भोसले ने घूमंतू जनजाति की समस्या को बताते हुए कहा कि " जर्मनी, फीनलैंड, ब्रिटेन से भी अधिक की जनसंख्या भारत में घूमंतू है, और इसकी हालात भिखारी जैसी है, 90 प्रतिशत लोगों के पास घर नहीं है और इतने ही प्रतिशत से अधिक अशिक्षित भी है।" 

दोनों वक्ताओं ने प्रश्नों के उत्तर देकर श्रोताओं के जिज्ञासा को शांत किया। इस वेबिनार के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ ज्ञानतोष कुमार झा, अंबेडकर स्टडी सर्कल के कन्वीनर अजीत कुमार, अंबेडकर स्टडी सर्कल के अध्यक्ष रहमत और अन्य अध्यापकों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी जुड़े। अंबेडकर स्टडी सर्कल के कन्वीनर अजीत कुमार ने वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन डॉ श्रीधरम ने किया।

डॉ ज्ञानतोष कुमार झा (प्राचार्य, आत्मा राम सनातन धर्म महाविद्यालय)
अजीत कुमार (संयोजक, अंबेडकर स्टडी सर्कल)
रहमत (अध्यक्ष, अंबेडकर स्टडी सर्कल)

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