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बिहार की राजनीति में वसीम मंजर जैसे युवाओं आवश्यकता है

पश्चिमी चंपारण का वसीम मंजर सिर्फ चंपारण जिले का ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का उम्मीद बनकर उभर रहा है। 32 वर्षीय वसीम मंजर को उनकी प्रतिभा और राजनीतिक समझ को देखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने उसे राष्ट्रीय सचिव के पद की जिम्मेदारी दी है। आपको बता दें कि वसीम मंजर अपने क्षेत्र में समाज सेवा के लिए प्रयाय माने जाते हैं। इन्होंने दिल्ली से शिक्षा हासिल किया लेकिन शहर की चकाचौंध उसे नहीं भाया, गांव लौट कर शिक्षा और खेलकूद के विकास पर काफ़ी ध्यान दे रहे हैं। ग़रीब कन्याओं की शादी के लिए आर्थिक मदद करते हैं। गांव समाज में गरीबों के जीवन स्तर को उठाने के लिए संघर्षरत हैं।तेजस्वी यादव के प्रेरणा से 2012 में राजद से जुड़े तभी से उनको प्रदेश की जिम्मेदारी से नवाजा जा रहा है। शुरुआत में तकनीकी प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता नियुक्त किया गया फिर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी दी गयी उसके बाद पंचायती राज प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव बनया गया। संगठन के प्रति आस्था और उनके समर्पण भाव को देखते हुए पार्टी ने अब उसे राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी है। राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास में पहली बार इतने कम उम्र के व्यक्ति क़ो यूवा राष्ट्रीय कमिटी में जगह दी गयी है। 

वर्तमान बिहार के सत्ताधारी पार्टी में राज हावी है नीति का अभाव है जिसके कारण बिहार अपनी प्राकृतिक व मानव-निर्मित समस्याओं को पीढ़ी दर पीढ़ी ढ़ोते-ढ़ोते बूढ़ा हो गया है। लेकिन बिहार अब फिर से जवान होना चाहता है। यह संभव तभी है जब बिहार की राजनीति की दशा और दिशा में आमूलचूल परिवर्तन आए।


इस आमूलचूल परिवर्तन के लिए बिहार के युवाओं ने कोशिश करना शुरू कर दिया है। इस कोशिश में सबसे अग्रणी वसीम मंजर ही हैं। वे कहते हैं कि "राजनीतिक फूहड़ता, जात-पात, गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार की बाढ़ में लोकतंत्र के पंक्ति में खड़ा सबसे अंतिम व्यक्ति को समान अधिकार दिलाने का निर्मल कोशिश अब बिहार के युवाओं को ही करना होगा।"



वसीम मंजर को अपने जन्मभूमि और कर्मभूमि की सेवा का जो धम्म (ड्यूटी) है उसका भली-भांति ज्ञान है। असफलता के डर से प्रयास न करना इनका स्वभाव नहीं है। यही नए बिहार की कहानी लिखेंगे क्योंकि बिहार की कहानी के बग़ैर भारत की कहानी अधूरा है।

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