जमात के लोगों से निवेदन है कि आक्रोश में न आएं और यह भूल जाएं कि उन्होंने राणा सांगा के साथ बड़ी-बड़ी लड़ाइयां लड़ी, जितवाया और सांगा के साथ मिलकर मरते दम तक बाबर से लोहा लिया, उसको कोई याद रखेगा और देशद्रोही व जिहादी नहीं कहेगा! वो यह भूल जाएं कि उन्होंने हमेशा राजनीति से दूरी बनाए रखी इसलिए उनके साथ कोई राजनीति नहीं करेगा। वो यह भूल जाएं कि उन्होंने कभी गैर मुस्लिमों को इस्लाम धर्म की शिक्षा देने पर जोर देने की बजाय खुद के पालन पर जोर दिया फिर उनका नाम जिहाद से क्यों जोड़ दिया गया? इस पर आक्रोशित न हों! और डॉक्टरों पर अपना आक्रोश व्यक्त न करें। सीधा सहयोग करें और जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके जांच अभी करा लें!
क्योंकि इस समय मुसलमानों का आंकड़ा ज्यादा दिखाने के लिए सरकार और मीडिया बहुत सक्रिय है। इतना कि अभी जांच होती भी नही, तभी यह बता दिया जा रहा है कि इतने लोग संक्रमित हो गए हैं। तो यह मुसलमानों के लिए सुनहरा अवसर भी है। जांच में कोई वैसी दिक्कत नही आएगी जैसा कि देश के अन्य हिस्सों में आ रही है और जांच की ही नही जा रही!
जिसके अभाव में देश विस्फोट से पहले के सन्नाटे वाले दौर से गुजर रहा है। उन्हें जो बताते हैं उन्हें बताने दीजिये। सरकार अपनी भयानक नाकामियों को छुपाने के लिए सारा ठीकरा आपके सर पे फोड़ना चाहती है, जैसे कोरोना निजामुद्दीन से ही शुरू हुआ। आप उसकी चिंता न करें। आप चाहे या न चाहें फोड़ा आपके सर पे ही जायेगा! इसलिए इस मौके का फायदा उठाइये और जांच करा लीजिये, अगर पॉजिटिव आता है तो बेड पकड़ लीजिये।
क्योंकि आप लोगों को भी नहीं पता और भक्तों को भी नहीं पता कि आगे आने वाले दिनों में क्या हाल होने जा रहा है! एक से डेढ़ महीने में सारे अस्पताल भर चुके होंगे! अगर ऐसे ही इस महामारी से जंग लड़ी गयी तो! जब देश के डॉक्टर मास्क, ग्लब्स आदि पीपीई मांग रहे हैं तब दो-दो कार्गो भरकर सर्बिया भेज दिया जा रहा है, जबकि इन्हीं संसाधनों के अभाव में दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों में डॉक्टर्स, नर्स और अन्य स्टाफ स्ट्राइक पर जा चुके हैं या जाने की धमकियां दे रहे हैं। स्थितियां इतनी भयावह होगी कि स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ मौत का तमाशा देखने लायक बचेगी! अमरीका का हस्र देख लीजिए कि सरकार कह रही है कि इससे दो लाख तक लोग केवल अमरीका में मरेंगे। अगर आप! अपने यहां का अनुमान लगा सकते हैं तो लगा लीजिये।
लेकिन साहेब यह जानते हैं कि इन्हें ईलाज नहीं, हिन्दू -मुसलमान चाहिए। क्योंकि यह नफरत का सनातनी मष्तिष्क है। जब मुसलमान नहीं थे तब भी दलितों के खिलाफ ऐसे ही काम करता था कि परछाई पड़ गयी, पानी छू दिया, सामने थूक दिया, घर के सामने से गुजर गया और फिर बस्ती की बस्ती फूंक दी जाती थी, पीट-पीटकर मार दिए जाते थे। बस इसे आज उपद्रव और लिंच करने के लिए बीमारी का बहाना मिल गया है और नफरत के लिए एक और नया समुदाय! जो आज थूक दिया-थूक दिया, थूककर जिहाद फैला फैला रहा है कह रहे हैं वही थूककर बसों के शीशे का निचला हिस्सा निहाल किये रहते हैं और दीवाल का कोना देखते ही सनातनी मष्तिष्क कार्रवाई कर गुजरता है। अभी जब शहरों से मजदूर पलायन कर रहे थे तब यही लुच्चे- की इन सालों को मर ही जाना चाहिए टाइप मैसेज लिख रहे थे और वायरल कर रहे थे। नफरत का यह सनातनी मष्तिष्क बहुत पुराना है! हम इनकी जाति, धर्म, पार्टी तीनों जानते हैं और इसके संयोग से बने मष्तिष्क की संरचना भी।
वो अब यही कहेगा कि जमात और मुसलमानों से इस देश मे कोरोना फैला ! अगर यह नहीं होता तो कोरोना को गरीब मजदूरों से फैला हुआ बताते। मोदी जी के महाकिर्तन और तीन महीने की लापरवाही से नही! जो बात भाजपा आईटी सेल द्वारा फैलाई गई कि जनता कर्फ्यू के दौरान 14 घंटे में वायरस की चेन टूट जाएगी और कोरोना खत्म हो जाएगा जिसके बाद लोग सड़कों पर निकल गए उससे नहीं! जमात होने के बाद इस देश के बीसियों मंदिर खुले रहे जहां हजारों और लाखों की संख्या में भीड़ रही और विदेशी लोग भी उससे नहीं! वो यह नहीं पूछेगा कि बिना किसी तैयारी और भोजन पानी के आश्वासन के, राज्यों के मुख्यमंत्रियों को तैयारी का अवसर दिए बिना लॉक डाउन कर दिया गया और लाखों लोग तीन दिन तक अलग अलग बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर जमा रहे उसकी जिम्मेदारी किसकी? अंतराष्ट्रीय उड़ान पर प्रतिबंध लगने के बाद प्राइवेट जेट से अलग एयरपोर्ट पर हजारों अमीर लोग विदेश से इंडिया लाये गए उसकी जिम्मेदारी किसकी ? अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से विदेश पंद्रह लाख लोग आए और जिनका चेकअप हुआ उनकी संख्या उससे बहुत कम है। बाकी लोग जो बिना चेक कराए निकल गए उसकी जिम्मेदारी किसकी? और जहां तक रहा यह मामला इसमें वह सरकार से यह नहीं पूछेगा कि आखिर वीजा कैसे और क्यों जारी किया गया? और जब लॉक डाउन हुआ तो विदेश मंत्रालय को तो यह पता ही था कि इस समय देश मे कहाँ कहाँ के विदेश से आये हुए लोग कहाँ कहाँ हैं? उसके लिए सरकार ने क्या कदम उठाए कि उन्हें अलग किया जाय या उनकी तत्काल जांच की जाय? जबसे कोरोना देश मे फैला है तबसे गृहमंत्री ही गायब है। इतने बड़े बड़े बलंडर साहेब के जिनपे मीडिया एक शब्द नहीं बोला और आज उसे मोदी की पिछली सारी गलतियों को मुसलमानों के सर डालने का एक आसान चारा और मौका मिल गया है मुसलमान! जब एक एक करके सारे देश अपने बॉर्डर सील कर रहे थे और कोरोना फैल चुका था तब ट्रंप का दौरा इंडिया में होता है वह भी ढाई हजार लोगों के साथ तब यही मीडिया जाकर उसमें नाच रहा था सवाल करने की बजाय कि यह क्यों हुआ इस समय ? उसकी जिम्मेदारी किसकी? वो ये सब नहीं पूछेंगे क्योंकि यह नफरत का सनातनी मष्तिष्क है........!!!
रवि प्रकाश
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क्योंकि इस समय मुसलमानों का आंकड़ा ज्यादा दिखाने के लिए सरकार और मीडिया बहुत सक्रिय है। इतना कि अभी जांच होती भी नही, तभी यह बता दिया जा रहा है कि इतने लोग संक्रमित हो गए हैं। तो यह मुसलमानों के लिए सुनहरा अवसर भी है। जांच में कोई वैसी दिक्कत नही आएगी जैसा कि देश के अन्य हिस्सों में आ रही है और जांच की ही नही जा रही!
जिसके अभाव में देश विस्फोट से पहले के सन्नाटे वाले दौर से गुजर रहा है। उन्हें जो बताते हैं उन्हें बताने दीजिये। सरकार अपनी भयानक नाकामियों को छुपाने के लिए सारा ठीकरा आपके सर पे फोड़ना चाहती है, जैसे कोरोना निजामुद्दीन से ही शुरू हुआ। आप उसकी चिंता न करें। आप चाहे या न चाहें फोड़ा आपके सर पे ही जायेगा! इसलिए इस मौके का फायदा उठाइये और जांच करा लीजिये, अगर पॉजिटिव आता है तो बेड पकड़ लीजिये।
क्योंकि आप लोगों को भी नहीं पता और भक्तों को भी नहीं पता कि आगे आने वाले दिनों में क्या हाल होने जा रहा है! एक से डेढ़ महीने में सारे अस्पताल भर चुके होंगे! अगर ऐसे ही इस महामारी से जंग लड़ी गयी तो! जब देश के डॉक्टर मास्क, ग्लब्स आदि पीपीई मांग रहे हैं तब दो-दो कार्गो भरकर सर्बिया भेज दिया जा रहा है, जबकि इन्हीं संसाधनों के अभाव में दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों में डॉक्टर्स, नर्स और अन्य स्टाफ स्ट्राइक पर जा चुके हैं या जाने की धमकियां दे रहे हैं। स्थितियां इतनी भयावह होगी कि स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ मौत का तमाशा देखने लायक बचेगी! अमरीका का हस्र देख लीजिए कि सरकार कह रही है कि इससे दो लाख तक लोग केवल अमरीका में मरेंगे। अगर आप! अपने यहां का अनुमान लगा सकते हैं तो लगा लीजिये।
लेकिन साहेब यह जानते हैं कि इन्हें ईलाज नहीं, हिन्दू -मुसलमान चाहिए। क्योंकि यह नफरत का सनातनी मष्तिष्क है। जब मुसलमान नहीं थे तब भी दलितों के खिलाफ ऐसे ही काम करता था कि परछाई पड़ गयी, पानी छू दिया, सामने थूक दिया, घर के सामने से गुजर गया और फिर बस्ती की बस्ती फूंक दी जाती थी, पीट-पीटकर मार दिए जाते थे। बस इसे आज उपद्रव और लिंच करने के लिए बीमारी का बहाना मिल गया है और नफरत के लिए एक और नया समुदाय! जो आज थूक दिया-थूक दिया, थूककर जिहाद फैला फैला रहा है कह रहे हैं वही थूककर बसों के शीशे का निचला हिस्सा निहाल किये रहते हैं और दीवाल का कोना देखते ही सनातनी मष्तिष्क कार्रवाई कर गुजरता है। अभी जब शहरों से मजदूर पलायन कर रहे थे तब यही लुच्चे- की इन सालों को मर ही जाना चाहिए टाइप मैसेज लिख रहे थे और वायरल कर रहे थे। नफरत का यह सनातनी मष्तिष्क बहुत पुराना है! हम इनकी जाति, धर्म, पार्टी तीनों जानते हैं और इसके संयोग से बने मष्तिष्क की संरचना भी।
वो अब यही कहेगा कि जमात और मुसलमानों से इस देश मे कोरोना फैला ! अगर यह नहीं होता तो कोरोना को गरीब मजदूरों से फैला हुआ बताते। मोदी जी के महाकिर्तन और तीन महीने की लापरवाही से नही! जो बात भाजपा आईटी सेल द्वारा फैलाई गई कि जनता कर्फ्यू के दौरान 14 घंटे में वायरस की चेन टूट जाएगी और कोरोना खत्म हो जाएगा जिसके बाद लोग सड़कों पर निकल गए उससे नहीं! जमात होने के बाद इस देश के बीसियों मंदिर खुले रहे जहां हजारों और लाखों की संख्या में भीड़ रही और विदेशी लोग भी उससे नहीं! वो यह नहीं पूछेगा कि बिना किसी तैयारी और भोजन पानी के आश्वासन के, राज्यों के मुख्यमंत्रियों को तैयारी का अवसर दिए बिना लॉक डाउन कर दिया गया और लाखों लोग तीन दिन तक अलग अलग बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर जमा रहे उसकी जिम्मेदारी किसकी? अंतराष्ट्रीय उड़ान पर प्रतिबंध लगने के बाद प्राइवेट जेट से अलग एयरपोर्ट पर हजारों अमीर लोग विदेश से इंडिया लाये गए उसकी जिम्मेदारी किसकी ? अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से विदेश पंद्रह लाख लोग आए और जिनका चेकअप हुआ उनकी संख्या उससे बहुत कम है। बाकी लोग जो बिना चेक कराए निकल गए उसकी जिम्मेदारी किसकी? और जहां तक रहा यह मामला इसमें वह सरकार से यह नहीं पूछेगा कि आखिर वीजा कैसे और क्यों जारी किया गया? और जब लॉक डाउन हुआ तो विदेश मंत्रालय को तो यह पता ही था कि इस समय देश मे कहाँ कहाँ के विदेश से आये हुए लोग कहाँ कहाँ हैं? उसके लिए सरकार ने क्या कदम उठाए कि उन्हें अलग किया जाय या उनकी तत्काल जांच की जाय? जबसे कोरोना देश मे फैला है तबसे गृहमंत्री ही गायब है। इतने बड़े बड़े बलंडर साहेब के जिनपे मीडिया एक शब्द नहीं बोला और आज उसे मोदी की पिछली सारी गलतियों को मुसलमानों के सर डालने का एक आसान चारा और मौका मिल गया है मुसलमान! जब एक एक करके सारे देश अपने बॉर्डर सील कर रहे थे और कोरोना फैल चुका था तब ट्रंप का दौरा इंडिया में होता है वह भी ढाई हजार लोगों के साथ तब यही मीडिया जाकर उसमें नाच रहा था सवाल करने की बजाय कि यह क्यों हुआ इस समय ? उसकी जिम्मेदारी किसकी? वो ये सब नहीं पूछेंगे क्योंकि यह नफरत का सनातनी मष्तिष्क है........!!!
रवि प्रकाश
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बिल्कुल सही कहा। सभी को धैर्य रखना चाहिए।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया
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