कोरोनावायरस के कारण प्रवासी बिहारी मजदूरों की स्थिति- कोरोनावायरस एक वैश्विक महामारी है। पूरा देश इससे परेशान है। इससे बचने के लिए देशभर में लाॅकडाउन चल रहा है। यह एक प्रकार का आपातकाल ही है, जिसे लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है। लाॅकडाउन के सहारे समाजिक दूरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि कोरोनावायरस को हराया जा सकें। लेकिन इसका पूरे देश पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, देश की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। विकास की रफ़्तार रूक सी गई है। सारी फैक्ट्रियां बंद है, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित प्रवासी बिहारी मजदूर हुए हैं। उनकी स्थिति कुछ ऐसी है कि जहां काम करते हैं वहां इस दौरान रहें तो बिना खाए मर जाएंगे। बिहारी मजदूर प्रावस के लिए क्यों मजबूर हैं आइए समझते हैं। ग्रामीण इलाकों का कृषि आधार वहाँ रहने वाले सभी लोगों को रोज़गार प्रदान नहीं करता है। क्षेत्रीय विकास में असमानता लोगों को ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित होने के लिये मजबूर करती है। शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के कारण विशेष रूप से उच्च शिक्षा प्राप्त लोग इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये लिये ग्रामीण लोगों क...
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