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बिहार की राजनीति में वसीम मंजर जैसे युवाओं आवश्यकता है

पश्चिमी चंपारण का वसीम मंजर सिर्फ चंपारण जिले का ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का उम्मीद बनकर उभर रहा है। 32 वर्षीय वसीम मंजर को उनकी प्रतिभा और राजनीतिक समझ को देखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने उसे राष्ट्रीय सचिव के पद की जिम्मेदारी दी है। आपको बता दें कि वसीम मंजर अपने क्षेत्र में समाज सेवा के लिए प्रयाय माने जाते हैं। इन्होंने दिल्ली से शिक्षा हासिल किया लेकिन शहर की चकाचौंध उसे नहीं भाया, गांव लौट कर शिक्षा और खेलकूद के विकास पर काफ़ी ध्यान दे रहे हैं। ग़रीब कन्याओं की शादी के लिए आर्थिक मदद करते हैं। गांव समाज में गरीबों के जीवन स्तर को उठाने के लिए संघर्षरत हैं।तेजस्वी यादव के प्रेरणा से 2012 में राजद से जुड़े तभी से उनको प्रदेश की जिम्मेदारी से नवाजा जा रहा है। शुरुआत में तकनीकी प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता नियुक्त किया गया फिर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी दी गयी उसके बाद पंचायती राज प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव बनया गया। संगठन के प्रति आस्था और उनके समर्पण भाव को देखते हुए पार्टी ने अब उसे राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी है। राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास म...
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अमेरिका में नस्लभेदी आंदोलन

25 मई के दिन अमेरिका में दो White पुलिसकर्मियों ने एक ब्लैक नागरिक को पकड़ लिया। एक पुलिसकर्मी ने अपना घुटना उस Black युवक की गर्दन पर टिका दिया। धरती पर पड़ा वह युवक दर्द से कराहता रहा, बिलबिलाता रहा, उसके मुंह से दो ही बातें निकल पा रही थीं, प्लीज अपना घुटना हटा लो "I can't Breathe" यानी मैं सांस नहीं ले पा रहा हूँ। पुलिस का घुटना ब्लैक नागरिक की गर्दन पर, और युवक का मुंह नीचे धरती में धंसा हुआ। ठीक 9 मिनट तक अमेरिकी पुलिसकर्मी ने उस ब्लैक नागरिक की गर्दन पर घुटना दबाए रखा। जब आसपास के नागरिकों ने पुलिसकर्मियों की इस हरकत का विरोध किया तो पुलिसकर्मी उनसे ही झगड़ने लगे। वहां खड़ी एक व्हाइट औरत ने ही घटनाक्रम की वीडियो बना ली। जो इस समय पूरी दुनिया में वायरल है। हालत गम्भीर होने पर उस युवक को अस्पताल ले जाया गया। जिसके ठीक 30 मिनट के अंदर युवक जिंदगी की जंग में हार गया। उस ब्लैक नागरिक का नाम था "George Floyd". जॉर्ज साइनपोलिस नाम की एक जगह पर वर्षों से रह रहा था। पास में ही एक कॉफी शॉप हुआ करता था। वह अक्सर वही चाय पीने आता था। जॉर्ज उस कॉफ़ी हाउस पर एक जाना पह...

प्रवासी मजदूर प्रवास क्यों करते हैं

कोरोनावायरस के कारण प्रवासी बिहारी मजदूरों की स्थिति- कोरोनावायरस एक वैश्विक महामारी है। पूरा देश इससे परेशान है। इससे बचने के लिए देशभर में लाॅकडाउन चल रहा है। यह एक प्रकार का आपातकाल ही है, जिसे लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है। लाॅकडाउन के सहारे समाजिक दूरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि कोरोनावायरस को हराया जा सकें। लेकिन इसका पूरे देश पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, देश की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। विकास की रफ़्तार रूक सी गई है। सारी फैक्ट्रियां बंद है, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित प्रवासी बिहारी मजदूर हुए हैं। उनकी स्थिति कुछ ऐसी है कि जहां काम करते हैं वहां इस दौरान रहें तो बिना खाए मर जाएंगे। बिहारी मजदूर प्रावस के लिए क्यों मजबूर हैं आइए समझते हैं। ग्रामीण इलाकों का कृषि आधार वहाँ रहने वाले सभी लोगों को रोज़गार प्रदान नहीं करता है। क्षेत्रीय विकास में असमानता लोगों को ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित होने के लिये मजबूर करती है। शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के कारण विशेष रूप से उच्च शिक्षा प्राप्त लोग इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये लिये ग्रामीण लोगों क...

मां पर दो कविता

ग़ज़ल मां के प्यार में कोई मिलावट नहीं होती है, इसलिए रिश्ता-ए-मुकद्दस कहलाती है मां।  जिंदगी में कायनात की हर खुशी मिल जाए, अपने बच्चों के लिए ऐसे बाहें फैलाती है मां। गुर्बत में जब घर में नहीं हो कुछ भी, तब भी अपने बच्चों को बहला लेती है मां। कभी गुनाह हो जाती है अपने बच्चों से, लेके जमानत रज़ा-ए-पाक की आ जाती है मां। जब अपने से कहीं दूर परेशानी में फंस जाते हैं बच्चे, आंसुओं को पोंछने ख्वाब में आ जाती है मां.. सफा-ए-हस्ती पे लिखती है उसूल-ए-जिंदगी, इसलिए तो मक़सद-ए-इस्लाम कहलाती है मां।। माँ माँ............, ये संसार कहता है तुझसे प्यारा, नहीं कोई इस दुनियां में। ये कहता है तुझ जैसा, कोई नही इस दुनियां में। माँ.........., तेरे आगे वो परवर-दिगार भी झुकता है, जिसके आगे सबका सिर झुकता है। तेरे साये पर ही सारा जग चलता है, जिसमें उसका भी साथ होता है। जब तू रूठ जाती है तब ऐसा लगता है, जैसे सारा जग बंजर हो चला हो। जब खोली मैंने भी आँखे अपनी, देखा सच कहता है ये संसार सारा। तेरे ना होने से ये घर सूना लगता है, ऐसा लगता है जैसे घर की जन्नत, रूठ क...

कहानी बिहार की

आज बिहार एक ऐसी मोड़ पर खड़ा हैं जहां से उम्मीद और निराशा की दोनों राह जाती है।  पिछले कई दशकों से अगर बिहार दुर्दशा झेल रहा है, तो इसकी असल वजह बिहार में राजनीति है। राजनीति में राज हावी रहा है, नीति का हमेशा अभाव रहा है। राज के हावी होने से बिहार में पिछड़े जाति और अगड़े जाति की लड़ाई और जंगल राज दोनों ने अपने पैर मजबूती से जमा लिया है। और नीति के अभाव में बिहार आज आजादी के 70 साल बाद भी अति पिछड़े राज्यों में आता है।  बिहार की अर्थव्यवस्था के ढांचे पर नज़र डालें तो निसंदेह यह समझा जा सकता है कि यहां संसाधनों का गंभीर अभाव है और हर साल बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं इसे और पिछे धकेल देती है। बिहार को मुश्किलों से निकालने के लिए लागातार सहायता की जरूरत है।  जाहिर है कि सारा मामला केंद्र सरकार पर टिका हुआ है। केंद्र सरकार भी बिहार के प्रति उदासीन रहा है। परंतु इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार के पास जो भी खुद का पैसा और संसाधन है वह किस तरह से खर्च किया जाए?  मतलब सारा मुद्दा आकर टिकता है 'शासन' पर। लेकिन दु:ख की बात यह है कि जिनके हाथ में सत्ता आती है, वे...

Most Beautiful journey Travel by train Kalka to Shimla

कहानी

अधूरा सपना रात के जब 10 बजते हैं तो बहुत सारे लोग बिस्तर पर लेट जाते हैं। जबकि नींद किसी-किसी को आती है। और कुछ लोग तो बहुत बदकिस्मत होते हैं जो नींद के लिए दवाई का सहारा लेते हैं। कालू और घटूं भी सबकी तरह इंसान हैं। लेकिन दोनों का मामला थोड़ा-सा अलग है। जब रात में दोनों को नींद नहीं आती है तो दोनों अपने इस हकीकत की भयानक दुनिया से सपनों की दुनिया में खो जाते हैं जहां वे सपने देख सकता है। हम जिस माॅर्डन स्टेट में रह रहे हैं दोनों भी इसी माॅर्डन स्टेट का हिस्सा है लेकिन अतंर यह है कि दोनों  हिस्सा होकर भी इससे वाक़िफ नहीं है। कालू और घटूं दो पक्के मित्र है। दोनों द्वारका से सटे पालम के झूग्गी में रहते हैं। कालू 10 साल का लड़का है और घटूं 9 साल का। दोनों के हालात एक जैसे हैं। पारिवारिक और आर्थिक स्थिति बिल्कुल एक समान है। कालू भी अपनी मां का इकलौता बेटा है और घटूं भी अपनी मां का इकलौता बेटा है। दोनों के पापा नहीं है। एक साल पहले जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। तब से ही दोनों कूड़ा बीनकर घर चलाने में मां की मदद करता है। इलाके के नगर निगम स्कूल में दोनों वहां किताब वाला बस्ता नह...